खुहामी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्रों और यहां कारोबार कर रहे लोगों के भीतर असुरक्षा की भावना बढ़ी है। उनका कहना है कि कई घटनाओं के बाद अभिभावकों के बीच भी चिंता बढ़ी, जिसका असर सीधे तौर पर छात्रों के दाखिलों पर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ वर्ष पहले तक राज्य में करीब 10 हजार कश्मीरी छात्र विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे थे, लेकिन अब उनकी संख्या में लगभग 70 प्रतिशत तक गिरावट आई है।








